Sunday, November 8, 2009
जिंदगी से जूझ रहे मास्टर चंदगीराम
जन्मदिन की बधाई के लिए संपर्क करने वालों से मास्टर जी ओलंपिक खेलों में अधिक पदक जीतने के बारे में बात करना शुरू कर देते हैं। उन्हें आज भी मीडिया से यह शिकायत है कि वह क्रिकेट के अलावा अन्य खेल खासकर कुश्ती पर तो ध्यान नहीं देता है।
शरीर के निचले हिस्से में खून नहीं जा पाने से दो माह से परेशान होने के बावजूद मास्टर चंदगीराम ने बताया कि अभी जरा तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन मैने एक योजना तैयार की है जिससे हम ओलंपिक खेलों की कुश्ती प्रतियोगिता में और ज्यादा पदक जीत सकते। इस बारे में मैं अस्पताल से बाहर आने पर आपसे विस्तार से बात करूंगा।
टेलीविजन के एक मशहूर कार्यक्रम खतरों के खिलाड़ी से अपनी अलग पहचान बना चुकी मास्टर जी की बेटी सोनिका कालीरमण ने अपने पिता के बारे में बताया कि कुश्ती उनके खून में है उनमें एक अजीब तरह का दीवानापन है जो सनकीपन की हद तक है। राष्ट्रमंडल खेलों की कुश्ती प्रतियोगिता के लिए अपने को तैयार कर रही सोनिका ने बताया कि मास्टर जी शुरू में लड़कियों को पहलवान बनाने को बहुत अच्छा नहीं मानते थे, लेकिन एक बार स्कूल में लड़के से छेड़खानी के मामले से वे इतना नाराज हुए कि उन्होंने कहा कि लड़कियों को भी अपनी रक्षा के लिए ताकतवर होना चाहिए और उन्होंने हमें पहलवान बनने की इजाजत दी।
हरियाणा के जिला हिसार के सिसाई गांव में नौ नवंबर 1937 में जन्मे चंदगीराम शुरू में कुछ समय के लिए भारतीय सेना की जाट रेजीमेंट में सिपाही रहे और बाद में स्कूल टीचर होने के कारण उनको मास्टर चंदगीराम भी कहा जाने लगा था। सत्तर के दशक के सर्वश्रेष्ठ पहलवान मास्टर जी को 1969 में अर्जुन पुरस्कार और 1971 में पदमश्री अवार्ड से नवाजा गया।
बीस साल की उम्र के बाद कुश्ती में हाथ आजमाना शुरू करने वाले मास्टर जी ने 1961 में राष्ट्रीय चैम्पियन बनने के बाद से देश का ऐसा कोई कुश्ती का खिताब नहीं रहा जो नहीं जीता हो। इसमें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अलावा हिंद केसरी, भारत केसरी, भारत भीम और रूस्तम-ए-हिंद आदि के खिताब शामिल हैं।ईरान के विश्व चैम्पियन अबुफजी को हराकर बैंकाक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना उनका सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन माना जाता है। उन्होंने 1972 म्युनिख ओलम्पिक में देश का नेतृत्व किया और दो फिल्मों 'वीर घटोत्कच' और 'टारजन' में काम किया और कुश्ती पर पुस्तकें भी लिखी।
[साभार: भाषा]
Tuesday, June 2, 2009
कसाब के वकील पर खुला सरकारी खजाना

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मामले की सुनवाई हर हफ्ते सोमवार से शुक्रवार तक पांच दिन होगी। कसाब का बचाव करने के लिए फीस के रूप में काजमी को हर हफ्ते 12,500 रुपये और हर महीने 50 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। कानूनन, यदि कोई आरोपी वकील पाने में विफल रहता है तो ऐसी स्थिति में राज्य के कानूनी सहायता प्रकोष्ठ से उसके बचाव के लिए एक वकील नियुक्त किया जाता है। आमतौर पर अदालत ऐसे मामलों के लिए नियुक्त वकील को पूरे मामले के लिए 900 रुपये देती है। इसलिए बहुत कम वकील आरोपी का बचाव करने के लिए आगे आते हैं। हालांकि, मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए विशेष अदालत ने वरिष्ठ वकील काजमी को बचाव पक्ष का वकील नियुक्त किया और महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया कि उन्हें तर्कसंगत भुगतान किया जाए।
न्यायमूर्ति एम एल टाहिलियानी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि विशेष मामला होने के कारण कसाब के वकील का मेहनताना राज्य द्वारा निर्धारित किया जाएगा और इसे उदाहरण के तौर पर रखकर अन्य मामलों में लागू नहीं किया जा सकेगा।विशेष अदालत ने इसके अनुरूप अपनी अनुशंसा [कसाब के लिए काजमी को बचाव पक्ष का वकील नियुक्त करने संबंधी] को राज्य सरकार के मुख्य सचिव के पास भेजा जिन्होंने इस प्रस्ताव को कानून और न्याय प्रभाग को भेज दिया। सूत्रों ने बताया कि विभाग ने काजमी के लिए ढाई हजार रुपये मेहनताने को मंजूरी दे दी।इस बारे में काजमी ने कहा,'कुछ दिन पहले इस संबंध में सरकारी अधिसूचना जारी हुई थी और मुझे इसकी एक प्रति मिली है।'विशेष अदालत में इस मामले की हर दिन होने वाली सुनवाई में अभी तक 35 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है।
साभार: एजेंसियां
Tuesday, April 7, 2009
सिख पत्रकार ने फेंका चिदंबरम पर जूता

Thursday, March 5, 2009
जादुई कैलेंडर 2009
अगर आप से कोई पूछे की 15 अगस्त को क्या वार है तो आप की निगाहें बरबस कैलेंडर की तरफ चली जाती हैं तथा आप झट से उस तारीख का वार देंगे। मगर आप के पास कैलेंडर न हो तो आपको काफी देर तक सोचना पड़ेगा तब जाके आप उस तारीख के वार के बारे में बता पाएंगे। अब हम आपको बिना कैलेंडर किसी भी तारीख का वार बताने की युक्ति बताते हैं बस सिर्फ आपको कुछ अंक याद करने पड़ेंगे।अगर आप से कोई 15 अगस्त का वार पूछे तो घबराइए मत नीचे दिए गए मासों में अगस्त के आगे दी गई संख्या 5 को 15 से जोड़कर 7 से भाग कर दें तथा जितना भी शेषफल बचे उसे सप्ताह के सात वारों में से क्रमवार रखकर ज्ञात कर सकते हैं जैसे:-
15 + 5
______
7
=
20
____
7
=
2
_____
7 । 20
। 14
_____
6
शेषफल = 6 [सप्ताह का छठा वार शनिवार होता है अत: 15 अगस्त को शनिवार है।]
प्रत्येक मास के अंक इस प्रकार हैं:-
जनवरी-3
फरवरी-6
मार्च-6
अप्रैल-2
मई-4
जून-0
जुलाई-2
अगस्त-5
सितंबर-1
अक्टूबर-3
नवंबर-6
दिसंबर-1
इस प्रकार आप इस साल की किसी भी तारीख का वार आसानी से निकाल सकते हैं।
प्रेषक:-
योगेश अहलावत
वार्ड नं.1, C/o श्री राज सिंह कादियान
चरखी दादरी, भिवानी
Saturday, February 14, 2009
प्रो. जीनी विनोबा पुरस्कार से सम्मानित

केंद्रीय हिंदी संस्थान में भाषा विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. जीनी को यह पुरस्कार गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद में आयोजित 31वें अखिल भारतीय नागरी लिपि सम्मेलन में प्रदान किया गया।
इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, शाल और नगद 7000 रुपये की राशि दी जाती है। आचार्य विनोबा भावे की सतप्रेरणा से यह पुरस्कार देवनागरी के उत्कृष्ट प्रयोग के लिए दिया जाता है।
Monday, February 2, 2009
बच्चों की मनोहारी प्रस्तुति से दर्शक हुए विभोर
कार्यक्रम में इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक तंवर बतौर मुख्य अतिथि और भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रकाशन विभाग के राष्ट्रीय संयोजक एवं हिंदी संघर्ष वाहिनी के अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
कछुए-खरगोश की कहानी के अलावा चंदामामा की सशक्त प्रस्तुति दर्शनीय रहीं। बच्चों ने मौके पर पुरातन काल से वर्तमान समय के बीच देश में हुई प्रमुख घटनाओं को बेहतर ढंग से दर्शाया। युद्ध भूमि पर मृत्यु शैया पर पहुंच चुके एक सैनिक की चिट्ठी को जिस सुंदर तरीके से कविता के माध्यम से सुनाया गया, वो नि:संदेह अविस्मरणीय रहा। राजस्थानी नृत्य, पंजाबी गिद्दा और ईद के त्यौहार पर छाने वाली मस्ती का भी उत्कृष्ट प्रदर्शन हुआ।
विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त डॉ. पीएस भूषण भी पहुंचे। अशोक तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के भविष्य को सुंदर ढंग से संवार कर ही आधुनिकतम भारत के निर्माण की परिकल्पना संभव है।
इस मौके पर हिंदी संघर्ष वाहिनी के अध्यक्ष एवं अक्षुण्ण भारत के कार्यकारी संपादक राजेश शर्मा ने बच्चों से आतंकवाद के विरुद्ध पूरे देश में अलख जगाने का आह्वान किया। समारोह में स्कूल की प्रधानाचार्य कमलेश सोलंकी, चेयरमैन राजेंद्र सिंह और रीना सांगवान समेत सभी शिक्षिकाएं और हजारों अभिभावक भी मौजूद थे।
Monday, January 19, 2009
जिंदगी की अंतिम लड़ाई लड़ता बिरजू
कुछ ऐसा ही नजारा कुल्टी रांची ग्राम मोड़ में इन दिनों देखने को मिल रहा है। जहां विगत एक पखवाड़े से एक 80 वर्षीय वृद्ध बिरजू मौत के इंतजार में लावारिस पड़ा अंतिम सांसे गिन रहा है। बिरजू की ये हालात समाज के उन ठेकेदारों के लिए करारा तमाचा है, जो सुरा और सुंदरी पर तो हजारों रुपये पानी की तरह बहाते है। परंतु जब एक इंसान सहायता की टकटकी लगाए जीवन की भीख मांगता है तो उसे लोग तिरस्कार की नजर से देखते हैं।
पिछले एक पखवाड़े से गंदगी में पड़ा बिरजू वहीं पर मल त्याग करने से लेकर खाना खाने को मजबूर है। परंतु ताज्जुब की बात है कि कुछ लोग उसके सामने कपड़े और खाना तो फेंक जा रहे हैं, परंतु उसको बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए आगे बढ़ने से हिचक रहे हैं।
बताया जाता है कि बिरजू रांचीग्राम स्थित चमड़ा गोदाम के समीप रहने वाला है। जिसका कोई परिजन नहीं है। जिस स्थान पर वह पड़ा हुआ है वहां से हिलना तो दूर वह एक निवाला तक नहीं ले पा रहा है। रांचीग्राम जहां राजनीतिक और समाजसेवी लोगों का केंद्र है, वहां एक वृद्ध सड़क पर पड़ा-पड़ा दम तोड़े इससे बड़ा शर्म की बात नहीं हो सकती।
[साभार दैनिक जागरण]